नवरात्रि पर प्रसाद के रूप में क्यों चढ़ाए जाते हैं हलवा, पूड़ी और चने?
इस विशेष दिन पर 9 कन्या और 1 लंगुर यानी बालक को भोग चढ़ाते हैं और उनको पूजते हैं. प्रसाद के रूप में पूड़ी, सूजी का हलवा और सूखे काले चने परोसे जाते हैं, जो सालों से चली आ रही परंपरा के रूप में है. यह परंपरा देवी भागवत पुराण में भी वर्णित है, जिसमें कन्याओं को देवी दुर्गा के स्वरूप माना गया है. देवी भागवत पुराण के अनुसार, इन कन्याओं को देवी दुर्गा के 9 रूपों का प्रतीक माना जाता है. कन्या पूजन के माध्यम से भक्त देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं.
कुछ क्षेत्रों में, चैत्र दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा के मस्तक से देवी चामुंडा के प्रकट होने की कथा प्रचलित है. देवी चामुंडा ने चंड, मुंड और रक्तबीज जैसे राक्षसों का वध किया था, जो महिषासुर के सहयोगी थे. महाष्टमी के दिन, भक्त 64 योगिनियों और अष्ट शक्तियों की पूजा करते हैं, जो देवी दुर्गा के आठ उग्र रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं.
क्या है इस प्रसाद के पीछे लॉजिक?
डायटिशियन और ऑथर ऋजुता दिवेकर के अनुसार, पूड़ी, हलवा और चने का यह कॉम्बिनेशन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है. सात्त्विक आहार के बाद, यह भोजन पाचन तंत्र को संतुलित करने में मदद करता है. चने और सूजी में उच्च मात्रा में आहार फाइबर होता है, जो ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में सहायक है. इसके अलावा, काले चने में सैपोनिन्स होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने में मदद करती हैं. इसी वजह से नवरात्रि के दौरान पूड़ी, हलवा और काले चने का भोग न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी है.
ऑस्ट्रेलियाई दूत ने भारत की विविधता की खुलकर तारीफ की
CBI को बड़ी सफलता, यूएई से भारत लाया गया भगोड़ा कमलेश पारेख
क्या गर्मी में ग्रीन-टी से बढ़ेगी गर्मी? एक्सपर्ट की राय
KL Rahul ने रचा इतिहास, खास रिकॉर्ड अपने नाम
Medical Tourism Boom: भारत बनेगा ग्लोबल हब, तेजी से बढ़ेगा कारोबार
जबलपुर हादसे से सबक, छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला
भारत-म्यांमार रिश्तों में मजबूती, नौसेना प्रमुख का अहम दौरा
मोबाइल और सोशल मीडिया का असर, मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा
सोडियम लेवल गिरा तो बढ़ सकता है खतरा, जानें लक्षण