हमीरपुर में टमाटर के गिरते दामों से किसान परेशान, सड़कों पर फेंकी अपनी फसल
टमाटर के दाम कभी किसानों को मालामाल, तो कभी उन्हें कर्जे के बोझ तले दबा देते हैं. इस बार टमाटर के गिरते दामों ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. उन्हें मुनाफा तो दूर, मंडी तक टमाटर ले जाने का भाड़ा तक नहीं मिल पा रहा है. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में दाम सही न मिलने पर एक टमाटर किसान ने अपनी कई कुंतल फसल को सड़क पर फेंक दिया. किसान मायूस होकर खाली जेब घर वापस लौट गया.
हमीरपुर के किसान ने अपने 5 कुंतल टमाटर को आवारा जानवरों को खिला डाला. यह किसान अपने घर से टमाटर सब्जी मंडी लेकर पहुंचा था, जहां उसे अपने घर से बाजार तक टमाटर पहुंचने का खर्च 30 रुपये प्रति क्रेट था, लेकिन बाजार में महज 20 से 25 रुपये क्रेट ही टमाटर की खरीद हो रही थी. उसे महज 2 से 3 रुपये किलो के हिसाब से ही भुगतान हो रहा था. इतने पैसो में उसके पैदवार की लागत ही नही निकल रही थी, इसी से परेशान होकर उसने अपने सारे टमाटरों को बाजार में ही फेक दिया.
2-3 रुपये मिल रहे थे दाम
मामला हमीरपुर जिला मुख्यालय के सदर सब्जी बाजार का है, जहां साप्ताहिक सब्जी बाजार लगती है. बाजार में कुरारा थाना क्षेत्र के कुसमरा गांव निवासी राजकुमार भी अपने 5 कुंतल टमाटर बेचने को पहुंचा था. यहां जब उसके टमाटरों की बोली लगाई गई तो वो महज 20 से 25 रुपये प्रति क्रेट के हिसाब से लगी. जबकि, उसके घर से बाजार तक टमाटर लाने का खर्चा ही 30 रुपये प्रति क्रेट पड़ रहा था. इस हिसाब से उसका टमाटर महज 2 से 3 रुपये किलो ही बिक रहा था.
मायूस होकर घर लौटा किसान
बाजार में फुटकर टमाटर बिकने का रेट 10 रुपये किलो था. किसान की इस रेट में उसकी लागत भी नही निकल रही थी. मजबूरन उसने अपने सारे टमाटर बाजार में ही आवारा जानवरो के सामने फेक दिए और मायूस होकर अपने घर चला गया. इस बीच किसान द्वारा फेंके गए टमाटरों को खाने के लिए जानवरों का झुंड टूट पड़ा. कुछ सब्जी खरीदने गए लोगो ने भी फ्री के टमाटरों की लूट की और अपने घर टमाटर ले गए. किसान राजकुमार की माने तो जो रेट बाजार में मिल रहा है उससे उसकी लागत नही निकल रही है उसको नुकसान हो रहा है इससे अच्छा है कि जानवरो का ही पेट भर जाये.
मंडी बनाने की मांग
सरकारों के किसानों को लाभ पहुचने के तमाम दावों के बीच उनको उनकी फसलो का सही लाभ नही मिल पा रहा है. जिले में कोई बड़ी सब्जी मंडी नही है, जहां किसान अपनी सब्जी बेचकर उसे बाहर की बाजारों में भेज सकें. किसान मांग करते आ रहे हैं कि सरकार को किसानों की पैदावार को उचित मंच देने की कोशिश के लिए मंडी का निर्माण कराए, जिससे बुंदेलखंड का बदहाल किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो सके.
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