चीन की गाड़ियों ने मचा रखा हड़कंप, कभी विदेशी अधिकारियों ने उड़ाया था मजाक, अब कर रहे राज
BYD चीन की ऑटोमोबाइल कंपनी बीवाईडी ने वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति को मजबूती से स्थापित किया है। पिछले वर्ष, कंपनी की बिक्री में 41% की वृद्धि हुई, जिससे उसने 42 लाख से अधिक वाहन बेचे। बीवाईडी मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों का निर्माण करती है, और पिछले साल उसने 17.6 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बेचे, जिससे वह एलन मस्क की टेस्ला के निकट पहुंच गई। टेस्ला की बिक्री में पिछले 10 वर्षों में पहली बार गिरावट आई है, जिसमें उसने 17.9 लाख गाड़ियां बेचीं, जबकि 2023 में उसकी बिक्री 18 लाख रही। बीवाईडी के तेजी से बढ़ते कारोबार ने अन्य कंपनियों को चिंतित कर दिया है, जिसके चलते हाल ही में जापान की तीन प्रमुख कंपनियों ने मर्जर की घोषणा की है।
बीवाईडी की 90% बिक्री चीन में होती है, जो टेस्ला, फॉक्सवैगन और टोयोटा के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। चीन में प्रतिस्पर्धा और सरकारी सब्सिडी के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में वृद्धि हुई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भी बीवाईडी की स्थिति मजबूत होती जा रही है।
उद्योग में मजबूती का सफर
अक्टूबर में यूरोपीय संघ ने चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात पर 45.3% का टैरिफ लागू किया था। अमेरिका ने भी चीन के इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% ड्यूटी लगा रखी है, और डोनाल्ड ट्रंप ने इसे और बढ़ाने की चेतावनी दी है। इसके बावजूद, बीवाईडी कई देशों में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रही है। यह सवाल उठता है कि इस कंपनी में ऐसा क्या विशेषता है जिसने वैश्विक ऑटो उद्योग को चिंतित कर रखा है। कंपनी ब्राजील, हंगरी, थाईलैंड और उजबेकिस्तान में असेंबली लाइन स्थापित कर रही है, और इसके साथ ही इंडोनेशिया और मेक्सिको में भी असेंबली लाइन खोलने की योजना है। पिछले वर्ष, मस्क ने कहा था कि चीनी कंपनियां दुनिया की अधिकांश कंपनियों को नष्ट करने की क्षमता रखती हैं।
बीवाईडी की स्थापना
बीवाईडी की स्थापना 1995 में वांग चुआनफू द्वारा की गई थी। प्रारंभ में, यह कंपनी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बैटरी का निर्माण करती थी। 2003 में, बीवाईडी ने एक कार निर्माण फैक्ट्री का अधिग्रहण किया, लेकिन शुरुआत में उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2007 में, जब बीवाईडी ने ग्वांगझू ऑटो शो में अपने नवीनतम मॉडल को प्रदर्शित किया, तब अमेरिकी अधिकारियों ने इसका मजाक उड़ाया, क्योंकि कार का पेंट ठीक से नहीं हुआ था और दरवाजा भी सही से फिट नहीं हो रहा था।
हालांकि, 2008 में कंपनी की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 2012 तक, बढ़ती मांग के कारण उत्पादन में भी वृद्धि होने लगी। बीवाईडी के पास सीमित मॉडल थे, जबकि विदेशी कंपनियों के पास कई आकर्षक विकल्प उपलब्ध थे, जिससे कंपनी की बिक्री और शेयरों की कीमत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। 2016 में, कंपनी ने ऑडी के बाजार से बाहर जाने का लाभ उठाया।
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